नए दौर में न्यायपालिका और पत्रकारिता
कोई भी मुद्दा हो, जब भाजपा प्रवक्ताओं के पास कहने को कुछ नहीं होता है तो वे आपातकाल का ज़िक्र करने लगते हैं. उनके फ़िक्स और सधे हुए डायलॉग होते हैं- 'आपातकाल में जब हुआ, तब आप कहां थे', 'हम पर अंगुली उठाने से पहले ज़रा आपातकाल को याद कर लीजिए', 'जिन्होंने देश पर आपातकाल थोपा था, वे हमें लोकतंत्र का पाठ न पढ़ाएं' आदि- इत्यादि. आपातकाल की 44 वीं सालगिरह के मौक़े का इस्तेमाल भी प्रधानमंत्री मोदी ने अप ने चिर-परिचित अंदाज़ में कांग्रेस को कोसने और अपनी पीठ थपथपाने के लिए किया. इस मौक़े पर उन्होंने अपने वक्तव्य के साथ एक वीडियो भी टीवी चैनलों के लिए जारी किया, जिसमें चित्रों और रेखांकनों के जरिए आ पातकाल की ज़्यादतियों का वर्णन है. लोकसभा में राष्ट्रपति के अ भिभाषण पर धन्यवाद देते हुए भी वे आपातकाल का ज़िक्र करना नहीं भूले. विपक्षी नेताओं की गिरफ्तारी, प्रेस सेंसरशिप, न्यायपालिका का दुरुपयोग आदि वही सारे मुद्दे उनके भाषण में रहे जो वे पिछले पांच छह सालों से चुनावी रैलियों में, संसद में, संसद के बाहर सरकारी-ग़ैर सरकारी कार्यक्रमों में और यहां तक कि विदेशी ध...